Hindi text

सरकारी दफ्तर अब यूनिकोड क्यों मांग रहे हैं, और पुरानी कृतिदेव फाइलों का क्या करें

केंद्र सरकार के दफ्तरों से 2009 से कहा गया है कि हिंदी का काम यूनिकोड फॉन्ट में करें, क्योंकि यूनिकोड का लेख हर कंप्यूटर पर खुलता है और उसमें खोज हो सकती है। पुरानी कृतिदेव फाइलों की एक बार यूनिकोड कॉपी बना लें, और मूल फाइलें भी संभालकर रखें।

पढ़ने में लगभग 4 मिनट

राजभाषा अनुभाग से निर्देश आया है कि अब हिंदी का सारा काम यूनिकोड में होगा। ठीक है, नया पत्र मंगल में टाइप कर लेंगे। लेकिन अलमारी जितनी फाइलें तो कंप्यूटर में भी हैं: पुराने सर्कुलर, आदेश, रजिस्टर, फॉर्मेट। सब कृतिदेव में। उनका क्या करें?

यह निर्देश कहाँ से आया

राजभाषा विभाग ने 2009 में एक कार्यालय ज्ञापन जारी करके केंद्र सरकार के दफ्तरों से कहा था कि हिंदी का काम यूनिकोड फॉन्ट में करें, जैसे मंगल। हाल के वार्षिक कार्यक्रम में भी सभी कंप्यूटरों पर यूनिकोड की व्यवस्था करने की बात कही गई है। कुछ दफ्तरों के अपने सर्कुलर में भी साफ लिखा मिलता है कि फाइल भेजने पर फॉर्मेटिंग बिगड़ने की वजह कृतिदेव है।

आपके विभाग में ठीक-ठीक क्या नियम लागू है, यह अपने दफ्तर का ताज़ा निर्देश देखकर ही तय करें।

यूनिकोड से रोज़ का काम कैसे आसान होता है

  • फाइल भेजने पर नहीं बिगड़ती। कृतिदेव की फाइल जिस कंप्यूटर पर Kruti Dev फॉन्ट नहीं है, वहाँ dk;kZy; जैसे अक्षरों में खुलती है। यूनिकोड की फाइल हर कंप्यूटर और फोन पर हिंदी में ही खुलती है।
  • खोज काम करती है। यूनिकोड फाइल में Ctrl+F से "आदेश" खोजेंगे तो मिलेगा। कृतिदेव में "आदेश" अंदर vkns'k है, इसलिए हिंदी शब्द से कुछ नहीं मिलता। फाइलों के ढेर में से एक पुराना आदेश ढूँढना हो तो यही सबसे बड़ा फर्क है।
  • ईमेल और पोर्टल पर सीधा चलता है। यूनिकोड का लेख ईमेल में, ऑनलाइन फॉर्म में या किसी पोर्टल पर सीधे पेस्ट हो जाता है।
  • Excel की सूचियाँ ठीक चलती हैं। नाम से खोज, सॉर्ट और दो सूचियाँ मिलाना, सब यूनिकोड में ही ठीक होता है।
  • स्क्रीन रीडर पढ़ पाता है। जो साथी कम देख पाते हैं और कंप्यूटर से लेख सुनते हैं, उनके लिए यूनिकोड हिंदी पढ़ी जा सकती है। कृतिदेव का लेख स्क्रीन रीडर को अंग्रेजी अक्षरों का बेमतलब ढेर लगता है।

पुरानी फाइलों के लिए एक आसान योजना

सारी फाइलें एक दिन में बदलने की ज़रूरत नहीं है। ऐसे चलें:

  1. पहले वो फाइलें जो रोज़ काम आती हैं। पत्र के फॉर्मेट, लेटरहेड, रजिस्टर, बार-बार भेजे जाने वाले फॉर्म। इन्हें यूनिकोड में बदलते ही नया काम अपने आप यूनिकोड में शुरू हो जाएगा।
  2. फिर वो फाइलें जिन्हें खोजना पड़ता है। पुराने आदेश और सर्कुलर, जिनका हवाला बार-बार देना पड़ता है।
  3. बाकी पुराना रिकॉर्ड, धीरे-धीरे, जब जिस फाइल की ज़रूरत पड़े।

फाइलें बदलने का तरीका

  1. कृतिदेव से यूनिकोड पेज खोलें।
  2. "बदली गई फ़ाइलों के लिए यूनिकोड फ़ॉन्ट" में Mangal चुनें, या जो फॉन्ट आपके दफ्तर में चलता हो।
  3. Word, Excel या PowerPoint की फाइलें (.docx, .xlsx, .pptx) बॉक्स के नीचे डालें। एक साथ कई फाइलें डाल सकते हैं।
  4. हर फाइल अलग से डाउनलोड होती है, नाम के आखिर में -unicode जुड़कर। सिर्फ Kruti Dev फॉन्ट वाला लेख बदलता है। अंग्रेजी, टेबल और फॉर्मेटिंग वैसी ही रहती है।
  5. हर फाइल में Ctrl+F से कोई एक हिंदी शब्द खोजकर देख लें, और टेबल वाले पेज एक बार देख लें।

पुरानी .doc और .xls फाइलें पहले Word या Excel में खोलकर .docx या .xlsx के रूप में सेव करनी होंगी। Word फाइल के बारे में पूरी बात Word फाइल वाले लेख में और Excel की Excel वाले लेख में है।

PDF वाले पुराने आदेश

PDF में बने कृतिदेव आदेशों का लेख भी इसी पेज पर निकल आता है: PDF डालें, और लेख को कॉपी करें या Word फाइल में डाउनलोड करें। तरीका सरकारी PDF वाले लेख में है। आगे से PDF यूनिकोड वाली Word फाइल से बनाएँ, तब PDF में भी हिंदी खोजी जा सकेगी।

दफ्तर के कागज़ बाहर नहीं जाते

बदलने का पूरा काम आपके कंप्यूटर के ब्राउज़र में होता है। फाइल किसी सर्वर पर अपलोड नहीं होती। इसलिए दफ्तर के अंदर के पत्र, कर्मचारियों की सूचियाँ या वेतन की शीट भी बदली जा सकती हैं, बिना इस फिक्र के कि वे कहीं और पहुँच जाएँगी।

ध्यान रखने वाली बातें

  • मूल फाइलें मिटाएँ नहीं। यूनिकोड कॉपी नई फाइल है। रिकॉर्ड के लिए मूल फाइल वैसी ही रहने दें।
  • बदली हुई फाइल एक बार पढ़ लें। नाम, तारीख और नंबर ज़रूर मिलाएँ। जिस अक्षर को टूल पहचान न पाए, उस पर निशान रहता है। कहाँ गलती की गुंजाइश ज़्यादा होती है, यह आम गलतियों वाले लेख में है।
  • नया काम शुरू से यूनिकोड में। टाइप करने वाले साथी कृतिदेव के आदी हों तो यूनिकोड में Remington (GAIL) लेआउट से उन्हें ज़्यादा नया नहीं सीखना पड़ता। इसके बारे में कृतिदेव, मंगल और यूनिकोड वाला लेख देखें।
  • प्रेस को कृतिदेव चाहिए तो। असली कॉपी यूनिकोड में रखें और सिर्फ छपाई के लिए मंगल से कृतिदेव बदलें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सरकारी काम में यूनिकोड क्यों ज़रूरी है?

यूनिकोड का लेख हर कंप्यूटर और फोन पर हिंदी में खुलता है, उसमें खोज होती है, और वह ईमेल और पोर्टल पर सीधा चलता है। केंद्र सरकार के दफ्तरों से 2009 से हिंदी का काम यूनिकोड फॉन्ट में करने को कहा गया है।

क्या सारी पुरानी फाइलें एक साथ बदलनी होंगी?

नहीं। पहले रोज़ काम आने वाले फॉर्मेट और फाइलें बदलें, फिर वे जिन्हें खोजना पड़ता है। बाकी जब ज़रूरत हो तब।

एक साथ कई फाइलें बदल सकते हैं?

हाँ। कृतिदेव से यूनिकोड पेज पर कई .docx, .xlsx या .pptx फाइलें एक साथ डाल सकते हैं। हर फाइल -unicode जुड़े नाम से अलग डाउनलोड होती है।

क्या दफ्तर की फाइलें कहीं अपलोड होती हैं?

नहीं। फाइलें आपके ब्राउज़र में ही बदलती हैं, हमारे सर्वर पर कुछ नहीं जाता।

मूल कृतिदेव फाइलें मिटा दें?

नहीं। यूनिकोड कॉपी अलग फाइल है। मूल फाइल रिकॉर्ड के लिए रखें, और प्रेस के लिए कभी कृतिदेव चाहिए तो वह भी काम आएगी।