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WhatsApp या Facebook पर कृतिदेव में लिखी हिंदी अंग्रेजी अक्षरों जैसी क्यों दिखती है (और भेजने से पहले क्या करें)
कृतिदेव में लिखी हिंदी असल में अंग्रेजी अक्षर होती है, जिसे सिर्फ Kruti Dev 010 फॉन्ट हिंदी जैसा दिखाता है। WhatsApp और Facebook में यह फॉन्ट नहीं होता, इसलिए भेजने से पहले लेख को कृतिदेव से यूनिकोड में बदल लें।
स्कूल की छुट्टी की सूचना Word में कृतिदेव में टाइप की। कॉपी करके स्टाफ के WhatsApp ग्रुप में डाली। और ग्रुप में दिखा: lHkh deZpkfj;ksa dks lwfpr fd;k tkrk gS fd। जबकि Word में यही लाइन बिल्कुल ठीक थी: "सभी कर्मचारियों को सूचित किया जाता है कि"।
मैसेज खराब नहीं हुआ है। उसके अंदर जो लिखा था, WhatsApp वही दिखा रहा है। दिक्कत फॉन्ट की है।
ऐसा क्यों होता है
कृतिदेव में टाइप करने पर कंप्यूटर में हिंदी के अक्षर जमा नहीं होते। जमा होते हैं अंग्रेजी कीबोर्ड के आम अक्षर और कुछ चिह्न। "और" असल में vkSj के रूप में जमा होता है, "नाम" uke के रूप में। Word में Kruti Dev 010 फॉन्ट इन अक्षरों को हिंदी की शक्ल में दिखाता है। इसलिए स्क्रीन पर आपको हिंदी दिखती है।
WhatsApp, Facebook, Gmail या फोन के मैसेज में यह फॉन्ट होता ही नहीं। कॉपी-पेस्ट करने पर फॉन्ट साथ नहीं जाता, सिर्फ अक्षर जाते हैं। वहाँ v का मतलब v ही है। इसलिए अंदर के अंग्रेजी अक्षर सामने आ जाते हैं। आपके कंप्यूटर में Kruti Dev हो तब भी फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि पढ़ने वालों के फोन में यह फॉन्ट नहीं है।
यूनिकोड इससे अलग है। उसमें "अ" सच में "अ" के रूप में जमा होता है। हर फोन, कंप्यूटर और ब्राउज़र इसे पहचानता है। WhatsApp, Facebook, ईमेल, गूगल सर्च, सब जगह हिंदी यूनिकोड में ही चलती है। मंगल (Mangal) फॉन्ट भी यूनिकोड का ही फॉन्ट है, इसलिए लोग अक्सर यूनिकोड को "मंगल" कह देते हैं।
आपका लेख कृतिदेव में है या यूनिकोड में, कैसे पहचानें
Word में देखकर पता नहीं चलता, क्योंकि दोनों हिंदी जैसे ही दिखते हैं। दो आसान तरीके हैं:
- लेख का थोड़ा हिस्सा कॉपी करके Notepad में या फोन के नोट्स में पेस्ट करें।
vkSjजैसे अंग्रेजी अक्षर आएँ तो लेख कृतिदेव में है। हिंदी ही रहे तो यूनिकोड में है। - Word में लेख पर क्लिक करें और ऊपर फॉन्ट वाले खाने में नाम देखें। Kruti Dev 010 लिखा हो तो लेख कृतिदेव में है। Mangal, Nirmala UI या Noto Sans Devanagari हो तो यूनिकोड में।
भेजने से पहले: स्टेप बाय स्टेप
- Word में लेख चुनकर कॉपी करें। पूरा लेख हो तो Ctrl+A, फिर Ctrl+C।
- कृतिदेव से यूनिकोड पेज खोलें और बॉक्स में पेस्ट करें। पेस्ट करते ही यूनिकोड हिंदी आ जाती है, अलग से कोई बटन नहीं दबाना पड़ता।
- नतीजे को एक बार पढ़ लें। कोई अक्षर टूल को समझ न आए तो वह उसे हटाता नहीं, निशान लगाकर वहीं छोड़ देता है और उसकी गिनती बताता है। ऐसी जगह आप खुद देखकर ठीक कर सकते हैं।
- मैसेज में अंग्रेजी शब्द हों, जैसे Meeting या PDF, तो "अंग्रेज़ी शब्द वैसे ही रखें" चालू रहने दें। यह पहले से चालू रहता है। तब
dy lqcg 10 cts Meeting gSसे आता है "कल सुबह 10 बजे Meeting है"। यह बंद हो तो Meeting को भी कृतिदेव मानकर बदल दिया जाता और बनता "डममजपदह"। जो शब्द अंग्रेजी मानकर छोड़े गए, उनकी लिस्ट नतीजे के नीचे दिखती है। उनमें से कोई असल में कृतिदेव का शब्द हो तो उस पर टैप करें, वह भी हिंदी में बदल जाएगा। - "टेक्स्ट कॉपी करें" दबाएँ और WhatsApp या Facebook में पेस्ट करके भेज दें।
आपका लेख इसी ब्राउज़र में रहता है। कुछ भी अपलोड नहीं होता, और पेस्ट किया लेख कहीं सेव नहीं होता। लंबा लेख हो तो वह हिस्सों में बदलता है और ऊपर दिखता रहता है कि कितना काम हो गया।
फोन से
फोन पर भी यही तरीका है। फोन के ब्राउज़र में पेज खोलें, लेख पेस्ट करें, नतीजा कॉपी करके WhatsApp में डाल दें। कोई ऐप डाउनलोड नहीं करना पड़ता।
किसी ने अंग्रेजी अक्षरों वाला मैसेज भेजा हो
उल्टा भी होता है। ग्रुप में कोई आदेश या सूचना आई और आपको Hkkjr ljdkj जैसे अक्षर दिख रहे हैं। समझ जाइए कि भेजने वाले ने कृतिदेव में लिखा लेख सीधे कॉपी करके भेजा है। उसे कॉपी करके उसी बॉक्स में पेस्ट करें, पढ़ने लायक हिंदी मिल जाएगी: "भारत सरकार"। Excel के किसी खाने से कॉपी किए कृतिदेव लेख पर भी यही तरीका चलता है। PDF से कॉपी किए लेख की बात थोड़ी अलग है, वह सरकारी PDF वाले लेख में समझाई है।
गलती से दो बार बदल दिया तो?
कोई बात नहीं। पेस्ट किया लेख पहले से यूनिकोड हो तो टूल उसे पहचान लेता है और बता देता है कि यह पहले से यूनिकोड हिंदी लग रहा है। इससे सही लेख दोबारा खराब नहीं होता।
Facebook पर पोस्ट पहले ही हो गई?
पोस्ट को Edit करें। अंग्रेजी अक्षरों वाला पूरा लेख कॉपी करके बॉक्स में पेस्ट करें। जो यूनिकोड हिंदी आए, उसे पुराने लेख की जगह लगाकर सेव कर दें।
ध्यान रखने वाली बातें
- छोड़े गए अंग्रेजी शब्दों की लिस्ट देख लें। पेस्ट किए लेख में कृतिदेव और अंग्रेजी एक जैसे अक्षरों से बने होते हैं, इसलिए टूल को शब्द देखकर तय करना पड़ता है कि कौन सा शब्द अंग्रेजी है। भेजने से पहले उस लिस्ट पर एक नज़र डाल लें।
- पूर्ण विराम से पहचानें। कृतिदेव में "।" के लिए
Aटाइप किया जाता है। ठीक से बदलने पर वहाँ "।" आता है। वाक्यों के आखिर में A बचा रह जाए तो समझिए वह हिस्सा नहीं बदला। - मात्राएँ मिला लें। "चौथा" जैसे शब्द कई कन्वर्टर "चैथा" बना देते हैं। किन शब्दों में ऐसी गलती ज़्यादा होती है, यह कन्वर्ज़न की आम गलतियों वाले लेख में है।
- रोज़ ऑनलाइन लिखते हैं तो सीधे यूनिकोड में लिखें। फोन का हिंदी कीबोर्ड यूनिकोड में ही लिखता है। कंप्यूटर पर यूनिकोड में टाइप करने के तरीके कृतिदेव, मंगल और यूनिकोड वाले लेख में बताए हैं। तब हर बार बदलने का झंझट नहीं रहेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Word में हिंदी ठीक दिखती है, WhatsApp पर क्यों बिगड़ जाती है?
कृतिदेव में लिखी हिंदी असल में अंग्रेजी अक्षर होती है। Word में Kruti Dev 010 फॉन्ट उन्हें हिंदी जैसा दिखाता है। WhatsApp में यह फॉन्ट नहीं होता, इसलिए असली अंग्रेजी अक्षर दिखने लगते हैं।
मोबाइल में कृतिदेव को यूनिकोड में कैसे बदलें?
फोन के ब्राउज़र में कृतिदेव से यूनिकोड पेज खोलें और लेख पेस्ट करें। यूनिकोड हिंदी तुरंत आ जाती है। उसे कॉपी करके WhatsApp में भेज दें। कोई ऐप नहीं चाहिए।
अपने फोन में Kruti Dev फॉन्ट डाल लूँ तो ठीक हो जाएगा?
नहीं। मैसेज पढ़ने वाले हर व्यक्ति के फोन में भी वही फॉन्ट चाहिए, और WhatsApp या Facebook अपना फॉन्ट इस्तेमाल करते हैं। लेख को यूनिकोड में बदलना ही पक्का तरीका है।
ईमेल में भी यही दिक्कत होती है?
हाँ। जहाँ Kruti Dev फॉन्ट नहीं है, वहाँ कृतिदेव का लेख अंग्रेजी अक्षरों में दिखता है। ईमेल भेजने से पहले भी लेख यूनिकोड में बदल लें।
मेरा लेख कहीं सेव होता है?
नहीं। बदलने का काम इसी ब्राउज़र में होता है। कुछ भी अपलोड नहीं होता, और टैब बंद करते ही पेस्ट किया लेख हट जाता है।